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ज़ुबैर रिज़वी

1935 - 2016 | दिल्ली, भारत

प्रमुखतम आधुनिक शायरों में विख्यात/अपनी साहित्यिक पत्रिका ‘ज़ह्न-ए-जदीद’ के लिए प्रसिद्ध

प्रमुखतम आधुनिक शायरों में विख्यात/अपनी साहित्यिक पत्रिका ‘ज़ह्न-ए-जदीद’ के लिए प्रसिद्ध

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
At a mushaira

ज़ुबैर रिज़वी

At a mushaira

ज़ुबैर रिज़वी

Bache aur Badbu_Nazm by Zubair Rizvi

One of the most prominent modern poets. Well-known broadcaster associated with All India Radio. Famous for his literary magazine Zahn-e-Jadeed. ज़ुबैर रिज़वी

Hind-o-Pak Dosti Aalmi Mushaira Houston 2005

ज़ुबैर रिज़वी

Hum kaha agaye_Nazm by Zubair Rizvi

One of the most prominent modern poets. Well-known broadcaster associated with All India Radio. Famous for his literary magazine Zahn-e-Jadeed. ज़ुबैर रिज़वी

Maine kab bark e tapa mauj e bala maangi_Ghazal by Zubair Rizvi

One of the most prominent modern poets. Well-known broadcaster associated with All India Radio. Famous for his literary magazine Zahn-e-Jadeed. ज़ुबैर रिज़वी

Suno kal tumhe humne madras cafe mein aabosh logon ke humraah dekha_Nazm by Zubair Rizvi

One of the most prominent modern poets. Well-known broadcaster associated with All India Radio. Famous for his literary magazine Zahn-e-Jadeed. ज़ुबैर रिज़वी

Tum kuch soch mein doob gai ho_Nazm by Zubair Rizvi

One of the most prominent modern poets. Well-known broadcaster associated with All India Radio. Famous for his literary magazine Zahn-e-Jadeed. ज़ुबैर रिज़वी

Zindagi aise gharo se khandar ache the_Ghazal by Zubair Rizvi

One of the most prominent modern poets. Well-known broadcaster associated with All India Radio. Famous for his literary magazine Zahn-e-Jadeed. ज़ुबैर रिज़वी

Zubair Rizvi ricitng his ghazal/nazm at sham e sher mushaira by Rekhta.org

One of the most prominent modern poets. Well-known broadcaster associated with All India Radio. Famous for his literary magazine Zahn-e-Jadeed. ज़ुबैर रिज़वी

तब्दीली

One of the most prominent modern poets. Well-known broadcaster associated with All India Radio. Famous for his literary magazine Zahn-e-Jadeed. ज़ुबैर रिज़वी

ज़ुबैर रिज़वी

अकेले होने का ख़ौफ़

हमें ये रंज था ज़ुबैर रिज़वी

अली-बिन-मुत्तक़ी रोया

पुरानी बात है ज़ुबैर रिज़वी

कई कोठे चढ़ेगा वो कई ज़ीनों से उतरेगा

ज़ुबैर रिज़वी

कुत्तों का नौहा

पुरानी बात है ज़ुबैर रिज़वी

ग़ुरूब-ए-शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ

ज़ुबैर रिज़वी

ज़िंदगी ऐसे घरों से तो खंडर अच्छे थे

ज़ुबैर रिज़वी

दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं

ज़ुबैर रिज़वी

बच्चे और बदबू

बच्चों उस्तादों और सर-परस्तों ने ज़ुबैर रिज़वी

बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो

ज़ुबैर रिज़वी

मैं ने कब बर्क़-ए-तपाँ मौज-ए-बला माँगी थी

ज़ुबैर रिज़वी

रद्द-ए-अमल

मुझे ये यक़ीं था ज़ुबैर रिज़वी

शफ़क़-सिफ़ात जो पैकर दिखाई देता है

ज़ुबैर रिज़वी

है धूप कभी साया शोला है कभी शबनम

ज़ुबैर रिज़वी

हम कहाँ आ गए

हम कहाँ आ गए ज़ुबैर रिज़वी

हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे

ज़ुबैर रिज़वी

शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

  • At a mushaira

    At a mushaira ज़ुबैर रिज़वी

  • At a mushaira

    At a mushaira ज़ुबैर रिज़वी

  • Bache aur Badbu_Nazm by Zubair Rizvi

    Bache aur Badbu_Nazm by Zubair Rizvi ज़ुबैर रिज़वी

  • Hind-o-Pak Dosti Aalmi Mushaira Houston 2005

    Hind-o-Pak Dosti Aalmi Mushaira Houston 2005 ज़ुबैर रिज़वी

  • Hum kaha agaye_Nazm by Zubair Rizvi

    Hum kaha agaye_Nazm by Zubair Rizvi ज़ुबैर रिज़वी

  • Maine kab bark e tapa mauj e bala maangi_Ghazal by Zubair Rizvi

    Maine kab bark e tapa mauj e bala maangi_Ghazal by Zubair Rizvi ज़ुबैर रिज़वी

  • Suno kal tumhe humne madras cafe mein aabosh logon ke humraah dekha_Nazm by Zubair Rizvi

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  • Tum kuch soch mein doob gai ho_Nazm by Zubair Rizvi

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  • Zubair Rizvi ricitng his ghazal/nazm at sham e sher mushaira by Rekhta.org

    Zubair Rizvi ricitng his ghazal/nazm at sham e sher mushaira by Rekhta.org ज़ुबैर रिज़वी

  • तब्दीली

    तब्दीली ज़ुबैर रिज़वी

  • ज़ुबैर रिज़वी

  • अकेले होने का ख़ौफ़

    अकेले होने का ख़ौफ़ ज़ुबैर रिज़वी

  • अली-बिन-मुत्तक़ी रोया

    अली-बिन-मुत्तक़ी रोया ज़ुबैर रिज़वी

  • कई कोठे चढ़ेगा वो कई ज़ीनों से उतरेगा

    कई कोठे चढ़ेगा वो कई ज़ीनों से उतरेगा ज़ुबैर रिज़वी

  • कुत्तों का नौहा

    कुत्तों का नौहा ज़ुबैर रिज़वी

  • ग़ुरूब-ए-शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ

    ग़ुरूब-ए-शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ ज़ुबैर रिज़वी

  • ज़िंदगी ऐसे घरों से तो खंडर अच्छे थे

    ज़िंदगी ऐसे घरों से तो खंडर अच्छे थे ज़ुबैर रिज़वी

  • दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं

    दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं ज़ुबैर रिज़वी

  • बच्चे और बदबू

    बच्चे और बदबू ज़ुबैर रिज़वी

  • बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो

    बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो ज़ुबैर रिज़वी

  • मैं ने कब बर्क़-ए-तपाँ मौज-ए-बला माँगी थी

    मैं ने कब बर्क़-ए-तपाँ मौज-ए-बला माँगी थी ज़ुबैर रिज़वी

  • रद्द-ए-अमल

    रद्द-ए-अमल ज़ुबैर रिज़वी

  • शफ़क़-सिफ़ात जो पैकर दिखाई देता है

    शफ़क़-सिफ़ात जो पैकर दिखाई देता है ज़ुबैर रिज़वी

  • है धूप कभी साया शोला है कभी शबनम

    है धूप कभी साया शोला है कभी शबनम ज़ुबैर रिज़वी

  • हम कहाँ आ गए

    हम कहाँ आ गए ज़ुबैर रिज़वी

  • हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे

    हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे ज़ुबैर रिज़वी