aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "empire"
निकल के सहरा से जिस ने रूमा की सल्तनत को उलट दिया थासुना है ये क़ुदसियों से मैं ने वो शेर फिर होशियार होगा
मैं ग़ज़ल की शबनमी आँख से ये दुखों के फूल चुना करूँमिरी सल्तनत मिरा फ़न रहे मुझे ताज-ओ-तख़्त ख़ुदा न दे
नहीं फ़क़्र ओ सल्तनत में कोई इम्तियाज़ ऐसाये सिपह की तेग़-बाज़ी वो निगह की तेग़-बाज़ी
क़ाएम है मुझ में मेरे तख़य्युल की सल्तनतबे-ताज बादशा हूँ मैं अपने वजूद में
हमें जो ख़ुद में सिमटने का फ़न नहीं आतातो आज ऐसी तिरी सल्तनत नहीं होती
दी बादशही हक़ ने तुझे हुस्न-नगर कीयू किश्वर-ए-ईराँ में सुलैमाँ सूँ कहूँगा
मुझे दें न ग़ैज़ में धमकियाँ गिरें लाख बार ये बिजलियाँमिरी सल्तनत ये ही आशियाँ मिरी मिलकियत ये ही चार पर
आप क्या मुझ को नवाज़ेंगे जनाब-ए-आलीसल्तनत तक मिरे इनआ'म में बिक जाती है
सल्तनत दस्त-ब-दस्त आई हैजाम-ए-मय ख़ातम-ए-जमशेद नहीं
या शब की सल्तनत में दिन का सफ़ीर आयाग़ुर्बत में आ के चमका गुमनाम था वतन में
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