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नज़्म
मोहब्बत की एक नज़्म
मैं ओस-क़तरों के आईनों में तुम्हें मिलूँगा
अगर सितारों में ओस-क़तरों में ख़ुशबुओं में न पाओ मुझ को
अमजद इस्लाम अमजद
ग़ज़ल
साहिर लुधियानवी
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ग़ज़ल
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
मिरे नगर की हसीं फ़ज़ाओ कहीं जो उन का निशान पाओ
तो पूछना ये कहाँ बसे वो कहाँ है उन का क़याम लिखना
हसन रिज़वी
नज़्म
मोहब्बत डाइरी हरगिज़ नहीं है
और तुम उस का हाथ हाथों में न ले पाओ
न आँखों ही में झाँको और न दिल की सल्तनत को फ़त्ह कर पाओ
सलीम कौसर
ग़ज़ल
न इत्मिनान से बैठो न गहरी नींद सो पाओ
मियाँ इस मुख़्तसर सी ज़िंदगी से चाहते क्या हो


