आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "azaab-e-aliim"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "azaab-e-aliim"
नज़्म
मुकाफ़ात
कभी न जान पे देखा था ये अज़ाब-ए-अलीम
कभी नहीं ऐ मेरे बख़्त-ए-वाज़गूँ मैं ने
नून मीम राशिद
ग़ज़ल
दिल का रोना दिल का खोना लाख अज़ाब-ए-अलीम सही
हिम्मत हार के बैठ ही जाएँ हम ऐसे नाकाम नहीं
वहीद क़ुरैशी
ग़ज़ल
हो अगर ज़िंदा तुम ऐ 'आलिम' तो अब होश्यार हो
कब तलक सोया करोगे थक गया ज़ानू-ए-दोस्त
मिर्ज़ा अल्ताफ़ हुसैन आलिम लखनवी
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
रेख़्ता शब्दकोश
'ilm-e-adab
'इल्म-ए-अदब عِلْمِ اَدَب
साहित्य-शास्त्र, किसी भाषा की गद्य या पद्य की पुस्तकें, जो किसी विशेष ज्ञान से संबंधित नहीं हैं, लेकिन उनकी भाषा उच्च कोटि की है
अन्य परिणाम "azaab-e-aliim"
ग़ज़ल
लिल्लाह हम से क़िस्सा-ए-'आलिम' न पूछिए
सुनते हैं लाश पर कोई भी नौहा-ख़्वाँ न था
मिर्ज़ा अल्ताफ़ हुसैन आलिम लखनवी
ग़ज़ल
जिन्हें याद थे फ़साने बहुत अपने बाज़ुओं के
ऐ 'अलीम' मुज़्महिल से वो दम-ए-नबर्द क्यूँ हैं
अलीम उस्मानी
ग़ज़ल
अलीम उस्मानी
ग़ज़ल
मिरा दिल तोड़ कर बर्बाद करते तो हैं वो 'आलिम'
ये मुश्त-ए-ख़ाक मिट कर इक नई दुनिया न हो जाए
सय्यद आलिम वास्ती
ग़ज़ल
क़दम कुछ ज़ब्त ओ जुरअत से उठाना शर्त है 'आलिम'
मोहब्बत फिर अगर नाकाम हो जाए तो हम जानें
सय्यद आलिम वास्ती
ग़ज़ल
अब आ के मेरी लाश से फ़रमा रहे हैं वो
'आलिम' ये तेरी अक़्ल-ओ-फ़रासत से दूर था
मिर्ज़ा अल्ताफ़ हुसैन आलिम लखनवी
ग़ज़ल
'आलिम' फ़लक-ए-तफ़रक़ा-पर्दाज़ का डर है
बनते ही बिगड़ जाए न तक़दीर हमारी
मिर्ज़ा अल्ताफ़ हुसैन आलिम लखनवी
ग़ज़ल
'आलिम' जहान-ए-इश्क़ कि दुश्वारियाँ न पूछ
दिल को जो राज़दार-ए-जिगर कर सके तो कर
मिर्ज़ा अल्ताफ़ हुसैन आलिम लखनवी
ग़ज़ल
फिर दिखाऊँगा मैं अनमोल जवाहर 'आलिम'
मिरी क़िस्मत से कोई अहल-ए-नज़र हो तो सही
मिर्ज़ा अल्ताफ़ हुसैन आलिम लखनवी
ग़ज़ल
मेरे मरने से हुए सैकड़ों अरमान शहीद
'आलिम' अंजाम में दिल गंज-ए-शहीदाँ निकला
मिर्ज़ा अल्ताफ़ हुसैन आलिम लखनवी
ग़ज़ल
वो अब आते ही होंगे और याँ पर आ के बैठेंगे
ख़ुदावंदा ये बातें कब तलक 'आलिम' करे दिल से
मिर्ज़ा अल्ताफ़ हुसैन आलिम लखनवी
ग़ज़ल
चौदहवाँ साल उसे देता है मुज़्दा 'आलिम'
ले मुबारक हो कि अब तू मह-ए-कामिल होगा


