aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "jaantaa"
आइना देख कर तसल्ली हुईहम को इस घर में जानता है कोई
जानता हूँ एक ऐसे शख़्स को मैं भी 'मुनीर'ग़म से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं
जानता है कि वो न आएँगेफिर भी मसरूफ़-ए-इंतिज़ार है दिल
तुझे कौन जानता था मिरी दोस्ती से पहलेतिरा हुस्न कुछ नहीं था मिरी शाइरी से पहले
उठ कर तो आ गए हैं तिरी बज़्म से मगरकुछ दिल ही जानता है कि किस दिल से आए हैं
जो कुछ हुआ वो कैसे हुआ जानता हूँ मैंजो कुछ नहीं हुआ वो बता क्यूँ नहीं हुआ
बहुत से लोग थे मेहमान मेरे घर लेकिनवो जानता था कि है एहतिमाम किस के लिए
तमाम उम्र कहाँ कोई साथ देता हैये जानता हूँ मगर थोड़ी दूर साथ चलो
क़ासिद के आते आते ख़त इक और लिख रखूँमैं जानता हूँ जो वो लिखेंगे जवाब में
जान तुम पर निसार करता हूँमैं नहीं जानता दुआ क्या है
जो दिल बाँधे वो जादू जानता हैमिरा महबूब उर्दू जानता है
जानता उस को हूँ दवा की तरहचाहता उस को हूँ शिफ़ा की तरह
मैं जानता हूँ मिरे बा'द ख़ूब रोएगारवाना कर तो रहा है वो हँसते हँसते मुझे
कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन सेकहीं भी जाऊँ मिरे साथ साथ चलते हैं
वो मिरी रूह की उलझन का सबब जानता हैजिस्म की प्यास बुझाने पे भी राज़ी निकला
बहला न दिल न तीरगी-ए-शाम-ए-ग़म गईये जानता तो आग लगाता न घर को मैं
जाना पड़ा रक़ीब के दर पर हज़ार बारऐ काश जानता न तिरे रह-गुज़र को मैं
मैं अपने-आप से कम भी हूँ और ज़ियादा भीवो जानता भी है मुझ को तो जानता क्या है
कुछ इतनी रौशनी में थे चेहरों के आइनेदिल उस को ढूँढता था जिसे जानता न था
मैं जानता हूँ तिरी रूह की तलब जानाँतुझे बदन की तरफ़ से नहीं छुऊँगा मैं
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