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ग़ज़ल
वो ज़िंदगी से क्या गया धुआँ उड़ा के रख दिया
मकाँ के इक सुतून ने मकाँ गिरा के रख दिया
आतिफ़ तौक़ीर
ग़ज़ल
तिरी दोस्ती का कमाल था मुझे ख़ौफ़ था न मलाल था
मिरा रोम रोम था हैरती मिरा दिल भी महव-ए-धमाल था
आतिफ़ वहीद यासिर
ग़ज़ल
शौक़-ए-सुरूर शाम-ए-ग़म अपने सिवा किसी का है
जाम-ओ-सुबू किसी के हैं कैफ़-ओ-नशा किसी का है
आतिफ़ तौक़ीर
ग़ज़ल
रहज़नों के हाथ सारा इंतिज़ाम आया तो क्या
फिर वफ़ा के मुजरिमों में मेरा नाम आया तो क्या
आतिफ़ वहीद यासिर
ग़ज़ल
आँखों को नक़्श-ए-पा तिरा दिल को ग़ुबार कर दिया
हम ने विदा-ए-यार को अपना हिसार कर दिया