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ग़ज़ल
अक्स-ए-फ़लक पर आईना है रौशन आब ज़ख़ीरों का
गर्म-ए-सफ़र है क़ाज़-ए-क़ाफ़िला सैल-ए-रवाँ है तीरों का
ज़ेब ग़ौरी
ग़ज़ल
अपनी ना-फ़हमी से मैं और न कुछ कर बैठूँ
इस तरह से तुम्हें जाएज़ नहीं एजाज़ से रम्ज़
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
ग़ज़ल
हम ने हर-चंद मला उन को बहुत रोग़न-ए-क़ाज़
पर किसी शक्ल ज़रा उन की रुखाई न गई
ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़
ग़ज़ल
दिल तो दिल अफ़ई-ए-गेसू वो बला है काफ़िर
इस का काटा कोई अफ़'ई भी न पानी माँगे
सययद मोहम्म्द अब्दुल ग़फ़ूर शहबाज़
ग़ज़ल
ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो
नश्शा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें
अहमद फ़राज़
ग़ज़ल
शाम हुए ख़ुश-बाश यहाँ के मेरे पास आ जाते हैं
मेरे बुझने का नज़्ज़ारा करने आ जाते होंगे