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ग़ज़ल
सवाद-ए-शाम-ए-ग़म में यूँ तो देर तक जला चराग़
न जाने क्यूँ थका थका उदास उदास था चराग़
नाज़िर सिद्दीक़ी
ग़ज़ल
सवाद-ए-शाम-ए-सफ़र का मलाल कुछ भी नहीं
करूँ मैं अर्ज़ भी क्या अर्ज़-ए-हाल कुछ भी नहीं
आरिफ़ कुकरावी
ग़ज़ल
ऐ शम्-ए-दिल-अफ़रोज़ शब-ए-तार-ए-मोहब्बत
बख़्शे है यही गर्मी-ए-बाज़ार-ए-मोहब्बत
मीर मोहम्मदी बेदार
ग़ज़ल
ज़वाल-ए-शाम-ए-हिज्राँ का इशारा देखता हूँ मैं
चराग़ों के बदन को पारा-पारा देखता हूँ मैं
इरफ़ान सिद्दीक़ी
ग़ज़ल
बड़ी दिलचस्पियों से सुब्ह-ए-शाम-ए-ज़िंदगी होगी
मैं देखूँगा उन्हें और सारी दुनिया देखती होगी
सीमाब अकबराबादी
ग़ज़ल
ख़्वाहिश-ए-शम'-ए-फ़रोज़ाँ से परेशाँ न हुआ
दिल क़नाअ'त के करम से तही-दामाँ न हुआ