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नज़्म
सय्यद वहीदुद्दीन सलीम
नज़्म
अब यही कोशिश है दिल से ऐ मिरी अर्ज़-ए-वतन
तेरी पेशानी पे अब कोई शिकन आने न पाए
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
नून मीम राशिद
नज़्म
चाहते सब हैं कि हों औज-ए-सुरय्या पे मुक़ीम
पहले वैसा कोई पैदा तो करे क़ल्ब-ए-सलीम
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
क्यों निगाहों में है अफ़्सुर्दा चराग़ों का धुआँ
आरज़ू-ए-लब-ओ-रुख़्सार में ये तो होगा
अहमद फ़राज़
नज़्म
है तिरी तिश्ना-लबी को आरज़ू-ए-जू-ए-आब
जुस्तुजू तेरी न हो वारफ़्ता-ए-दश्त-ए-सराब
ज़फ़र अहमद सिद्दीक़ी
नज़्म
सोते हैं ख़ामोश आबादी के हंगामों से दूर
मुज़्तरिब रखती थी जिन को आरज़ू-ए-ना-सुबूर