आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "da.avaa-e-sehr-e-bayaanii"
नज़्म के संबंधित परिणाम "da.avaa-e-sehr-e-bayaanii"
नज़्म
सेहर-ए-मौसीक़ी हुआ फिर गूँज उठे गोकुल के बन
रक़्स फ़रमाने लगी फिर वादी-ए-गंग-ओ-जमन
अर्श मलसियानी
नज़्म
काटती है सेहर-ए-सुल्तानी को जब मूसा की ज़र्ब
सतवत-ए-फ़िरऔन हो जाती है अज़ ख़ुद ग़र्क़-ए-आब
वामिक़ जौनपुरी
नज़्म
दवा-ए-दर्द-ए-दिल के तुम न मिन्नत-कश हुए चूँकि
तुम्हारे 'इश्क़ में तुम पर रही अपनी ख़ुदी ग़ालिब
हसन नवाब हसन
नज़्म
सौ जल्वे हैं नज़रों से मानिंद-ए-नज़र पिन्हाँ
दा'वा-ए-जहाँ-बीनी ऐ दीदा-वरी क्यों है