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नज़्म
दिल-ए-मुज़्तर की राहत है कि ये तस्वीर है तेरी
तिरी तस्वीर से रहमत बरसती है गुरु-नानक
तिलोकचंद महरूम
नज़्म
नक़्श जिन के नाम हैं अब तक दिल-ए-ग़मनाक पर
रहमत-ए-ईज़द हो दाइम इन की जान-ए-पाक पर
तिलोकचंद महरूम
नज़्म
अंदाज़-ए-दिल-फ़रेबी जो तुझ में है कहाँ है
फ़ख़्र-ए-ज़माना तू है और नाज़िश-ए-जहाँ है
तिलोकचंद महरूम
नज़्म
चमकते हुए सब बुतों को मिटा दो
कि अब लौह-ए-दिल से हर इक नक़्श हर्फ़-ए-ग़लत की तरह मिट चुका है
फ़ख़्र-ए-आलम नोमानी
नज़्म
मुझे तेरे तसव्वुर से ख़ुशी महसूस होती है
दिल-ए-मुर्दा में भी कुछ ज़िंदगी महसूस होती है
कँवल एम ए
नज़्म
गुल से अपनी निस्बत-ए-देरीना की खा कर क़सम
अहल-ए-दिल को इश्क़ के अंदाज़ समझाने लगीं
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
कुछ इस तरह से बढ़ा दिल में ज़ौक़-ए-आज़ादी
कि रफ़्ता रफ़्ता तमन्ना जवान होती गई
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
यूँ फ़ज़ाओं में रवाँ है ये सदा-ए-दिल-नशीं
ज़ेहन-ए-शाइर में हो जैसे इक अछूता सा ख़याल