आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "mafaadaat"
नज़्म के संबंधित परिणाम "mafaadaat"
नज़्म
मेरे सपने बुनती होंगी बैठी आग़ोश पराई में
और मैं सीने में ग़म ले कर दिन-रात मशक़्क़त करता हूँ
साहिर लुधियानवी
नज़्म
धूप के झुलसे हुए रुख़ पर मशक़्क़त के निशाँ
खेत से फेरे हुए मुँह घर की जानिब है रवाँ
जोश मलीहाबादी
नज़्म
तक़दीर के क़ाज़ी का ये फ़तवा है अज़ल से
है जुर्म-ए-ज़ईफ़ी की सज़ा मर्ग-ए-मुफ़ाजात!