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नज़्म
तुम एक मुजस्समा
जो फ़नकार की उँगलियों में
परवान नहीं चढ़ा
तुम एक मुजस्समा
जिस पर संग-ए-मरमर
नर्म पड़ गया
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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तुम एक मुजस्समा
जो फ़नकार की उँगलियों में
परवान नहीं चढ़ा
तुम एक मुजस्समा
जिस पर संग-ए-मरमर
नर्म पड़ गया