न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाए: बशीर बद्र
इस चयन में बशीर बद्र के ऐसे मशहूर और लोकप्रिय शेर शामिल किए गए हैं जिनमें मोहब्बत, तन्हाई, यादें, रिश्तों की नज़ाकत और समकालीन एहसास जैसे विभिन्न जज़्बात और कैफ़ियत की भरपूर अभिव्यक्ति मिलती है। उनके अशआर सादगी, दिलकशी और गहरे मानवीय अनुभवों की तरजुमानी करते हैं। यही वजह है कि उनकी शायरी हर दौर के पाठकों में समान रूप से लोकप्रिय रही है।
कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी
यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में कहने वाला बेवफ़ाई को सिर्फ़ ग़द्दारी नहीं मानता, बल्कि मानवी मजबूरी से जोड़कर देखता है। उसका ख़याल है कि अगर कोई दूर हुआ या वफ़ा न निभा सका, तो ज़रूर कुछ दबाव, हालात या लाचारी रही होगी — वरना कोई यूँ ही बेवफ़ा नहीं बन जाता। यह बात एक तरह की तसल्ली भी है और इल्ज़ाम को हल्का करने की कोशिश भी।
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में कहने वाला बेवफ़ाई को सिर्फ़ ग़द्दारी नहीं मानता, बल्कि मानवी मजबूरी से जोड़कर देखता है। उसका ख़याल है कि अगर कोई दूर हुआ या वफ़ा न निभा सका, तो ज़रूर कुछ दबाव, हालात या लाचारी रही होगी — वरना कोई यूँ ही बेवफ़ा नहीं बन जाता। यह बात एक तरह की तसल्ली भी है और इल्ज़ाम को हल्का करने की कोशिश भी।
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टैग्ज़ : फ़ेमस शायरीऔर 2 अन्य
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अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जाएगा
तुम्हें जिस ने दिल से भुला दिया उसे भूलने की दुआ करो
इसी शहर में कई साल से मिरे कुछ क़रीबी अज़ीज़ हैं
उन्हें मेरी कोई ख़बर नहीं मुझे उन का कोई पता नहीं
है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है
कहीं कारोबार सी दोपहर कहीं बद-मिज़ाज सी शाम है
मैं तमाम दिन का थका हुआ तू तमाम शब का जगा हुआ
ज़रा ठहर जा इसी मोड़ पर तेरे साथ शाम गुज़ार लूँ
कभी यूँ भी आ मिरी आँख में कि मिरी नज़र को ख़बर न हो
मुझे एक रात नवाज़ दे मगर इस के बाद सहर न हो