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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

ताकि उर्दू की सदा, सदा गूँजती रहे

रेख़्ता ज़बान व अदब और उससे वाबस्ता तहज़ीब व सक़ाफ़त को हर उस शख़्स तक पहुँचा रहा है, जिसके पास तलाश का जज़्बा और इंटरनेट की सहूलत है।

लेकिन इस तरह के प्लेटफ़ॉर्म तभी क़ायम रह पाते हैं जब कुछ लोग महज़ नाज़िरीन नहीं रहते, बल्कि सरपरस्त बनकर उनका साथ देते हैं।

आप भी रेख़्ता का साथ दीजिए और उर्दू के क़ीमती अदबी सरमाये को रोज़मर्रा ज़िंदगी का हिस्सा बनाए रखने में अपना किरदार अदा कीजिए।

आपके तआवुन से मुमकिन हो पाता है:

अदबी सरमाये तक बिला मुआवज़ा रसाई

रेख़्ता पर लाखों लोग बग़ैर किसी सब्सक्रिप्शन के उर्दू पढ़ते, सुनते और सीखते हैं।

महफ़ूज़कारी और डिजिटाइज़ेशन

नादिर व नायाब तहरीरों को निहायत एहतियात से डिजिटल शक्ल में महफ़ूज़ किया जाता है, ताकि आने वाली नस्लें उनसे फ़ैज़याब होती रहें।

उर्दू के अदबी माहौल को मुतहर्रिक रखने की कोशिश

शुअरा, उदबा, मुदीरान और फ़नकारों ने मिलकर रेख़्ता को एक मुतहर्रिक सक़ाफ़ती प्लेटफ़ॉर्म बना दिया है।

उर्दू के नए चाहने वालों तक पहुँचने की कोशिश

रेख़्ता के अदबी प्रोग्राम, तालीमी वसाइल और मुतनव्वे मवाद उर्दू को रिवायती हल्क़ों से निकालकर नई नस्लों और नए ज़ेहनों तक पहुँचा रहे हैं।

ज़बान के फ़रोग़ का एक हमागीर मिशन

रेख़्ता डॉट ऑर्ग एक वसीअतर सक़ाफ़ती मिशन का हिस्सा है। रेख़्ता फ़ाउंडेशन हिंदुस्तानी ज़बानों के फ़रोग़ और तहफ़्फ़ुज़ के लिए सरगर्मे अमल है। यह मिशन हिंदवी, अंजस, सूफ़ीनामा और रेख़्ता गुजराती जैसे प्लेटफ़ॉर्म्स के ज़रिए आगे बढ़ाया जा रहा है।

सहयोग के अन्य तरीके
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