आज के चुनिन्दा 5 शेर

वो अक्स बन के मिरी चश्म-ए-तर में रहता है

अजीब शख़्स है पानी के घर में रहता है

बिस्मिल साबरी
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दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं

कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं

जिगर मुरादाबादी

किसी को क्या बताऊँ कौन हूँ मैं

कि अपनी दास्ताँ भूला हुआ हूँ

सलीम अहमद

उन की महफ़िल में 'ज़फ़र' लोग मुझे चाहते हैं

वो जो कल कहते थे दीवाना भी सौदाई भी

यूसुफ़ ज़फ़र

उम्र-ए-दराज़ माँग के लाई थी चार दिन

दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में

a long life, four days in all, I did negotiate

two were spent in hope and two were spent in wait

a long life, four days in all, I did negotiate

two were spent in hope and two were spent in wait

सीमाब अकबराबादी
आज का शब्द

तहसीन

  • tahsiin
  • تحسین

शब्दार्थ

praise

तहसीन के लायक़ तिरा हर शेर है 'अकबर'

अहबाब करें बज़्म में अब वाह कहाँ तक

शब्दकोश

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क्या आप जानते हैं?

प्रोफ़ेसर उस्लूब अहमद अंसारी (1925-2016) अंग्रेज़ी के प्रोफ़ेसर और अंग्रेज़ी व उर्दू के अहम गद्यकार और आलोचक थे। उनकी स्मृति इतनी कुशाग्र थी कि कई बार रेडियो पर रिकार्डिंग के लिए या किसी और मौक़े पर पढ़ने के लिए अगर अपना आलेख ले जाना भूल जाते थे तो शब्दश: दोबारा लिख कर आलेख उसी तरह तैयार कर लेते थे। वह बहुत कम बोलने वाले और एकांत प्रिय थे, किताबें उनकी साथी थीं। उनकी बहुत बड़ी निजी लाइब्रेरी थी जिसकी अधिकतर किताबों पर वह विशेष चिन्ह बना देते थे जो उनके लेखन में सहायक होते थे। रात के शांतिपूर्ण वातावरण में वह पढ़ने-लिखने में तल्लीन होते थे या अंग्रेज़ी और उर्दू शायरों के कलाम बहुत शौक से ऊंची आवाज़ में पढ़ा करते थे।उनके बारे में यह विवरण उनकी बेटी इफ़्फ़त आरा ने अपनी किताब 'नशेब ओ फ़राज़' में प्रस्तुत किया है। प्रोफ़ेसर अंसारी फ़ारसी के भी जानकार थे। ग़ालिब और इक़बाल की शायरी पर उनकी कई महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। वह उर्दू में व्यवहारिक(पाठ आधारित) आलोचना के संस्थापक माने जाते हैं।

आर्काइव

आज की प्रस्तुति

आधुनिक उर्दू ग़ज़ल के संस्थापकों में से एक। भारत के शहर अंबाला में पैदा हुए और पाकिस्तान चले गए जहाँ बटवारे के दुख दर्द उनकी शायरी का केंद्रीय विषय बन गए।

दिल धड़कने का सबब याद आया

वो तिरी याद थी अब याद आया

पूर्ण ग़ज़ल देखें

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इक़बाल अशहर

Udaasi Bhali Lagi Aisi | Iqbal Ashhar Poetry | Rekhta Studio

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