आज के चुनिन्दा 5 शेर

ताइर-ए-लाहूती उस रिज़्क़ से मौत अच्छी

जिस रिज़्क़ से आती हो परवाज़ में कोताही

अल्लामा इक़बाल

दिल के फफूले जल उठे सीने के दाग़ से

इस घर को आग लग गई घर के चराग़ से

this hearts blisters are inflamed by its own desire

by its own lamp,alas, this house is set afire

this hearts blisters are inflamed by its own desire

by its own lamp,alas, this house is set afire

महताब राय ताबां

बुरा मान 'ज़िया' उस की साफ़-गोई का

जो दर्द-मंद भी है और बे-अदब भी नहीं

ज़िया जालंधरी

देख रफ़्तार-ए-इंक़लाब 'फ़िराक़'

कितनी आहिस्ता और कितनी तेज़

फ़िराक़ गोरखपुरी
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अब के इस बज़्म में कुछ अपना पता भी देना

पाँव पर पाँव जो रखना तो दबा भी देना

ज़फ़र इक़बाल
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आज का शब्द

मुंसिफ़

  • munsif
  • منصف

शब्दार्थ

judge, arbitrator

मुन्सिफ़ हो अगर तुम तो कब इंसाफ़ करोगे

मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँ नहीं देते

शब्दकोश
आर्काइव

आज की प्रस्तुति

अपनी ग़ज़ल 'गो ज़रा सी बात पर बरसों के याराने गए' के लिए विख्यात, जिसे कई गायकों ने गाया है।

गो ज़रा सी बात पर बरसों के याराने गए

लेकिन इतना तो हुआ कुछ लोग पहचाने गए

पूर्ण ग़ज़ल देखें
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हबीब जालिब

मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता | हबीब जालिब

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