आज के चुनिन्दा 5 शेर

शम्अ' तुझ पे रात ये भारी है जिस तरह

मैं ने तमाम उम्र गुज़ारी है इस तरह

नातिक़ लखनवी
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क़ुर्बतें होते हुए भी फ़ासलों में क़ैद हैं

कितनी आज़ादी से हम अपनी हदों में क़ैद हैं

सलीम कौसर

इक बार उस ने मुझ को देखा था मुस्कुरा कर

इतनी तो है हक़ीक़त बाक़ी कहानियाँ हैं

मेला राम वफ़ा
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ज़िंदगी क्या है आज इसे दोस्त

सोच लें और उदास हो जाएँ

फ़िराक़ गोरखपुरी
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दश्त की धूप है जंगल की घनी रातें हैं

इस कहानी में बहर हाल कई बातें हैं

जावेद नासिर
आज का शब्द

लबरेज़

  • labrez
  • لبریز

शब्दार्थ

Brimful

दिल वो है कि फ़रियाद से लबरेज़ है हर वक़्त

हम वो हैं कि कुछ मुँह से निकलने नहीं देते

शब्दकोश
आर्काइव

स्मृति

पुण्य तिथि

महत्वपूर्ण प्रगतिशील शायर और फ़िल्म गीतकार। फ़िल्म गीतकार जावेद अख़्तर के पिता

आहट सी कोई आए तो लगता है कि तुम हो

साया कोई लहराए तो लगता है कि तुम हो

पूर्ण ग़ज़ल देखें
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मुज़फ्फर अली

With Waheeda Rehman & Shabana Azmi | Jashn-e-Rekhta 4th Edition 2017

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