आज के चुनिन्दा 5 शेर

सुर्ख़-रू होता है इंसाँ ठोकरें खाने के बा'द

रंग लाती है हिना पत्थर पे पिस जाने के बा'द

सय्यद मोहम्मद मस्त कलकत्तवी
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वो बात सारे फ़साने में जिस का ज़िक्र था

वो बात उन को बहुत ना-गवार गुज़री है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या

कहती है तुझ को ख़ल्क़-ए-ख़ुदा ग़ाएबाना क्या

हैदर अली आतिश

ज़ेहन में याद के घर टूटने लगते हैं 'शहाब'

लोग हो जाते हैं जी जी के पुराने कितने

मुस्तफ़ा शहाब
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'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से

मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया

शाद आरफ़ी
आज का शब्द

बार

  • baar
  • بار

शब्दार्थ

burden/ encumbrance

सब पे जिस बार ने गिरानी की

उस को ये ना-तवाँ उठा लाया

शब्दकोश
आर्काइव

आज की प्रस्तुति

पाकिस्तान के अग्रणी आधुनिक शायरों में से एक, अपने अपारम्परिक अंदाज़ के लिए मशहूर।

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सैफ़ महमूद

Urdu Mein Tanz-o-Mizah | Jashn-e-Rekhta 4th Edition 2017

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