आज के चुनिन्दा 5 शेर

मैं समझा आप आए कहीं से

पसीना पोछिए अपनी जबीं से

अनवर देहलवी
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कमर बाँधे हुए चलने को याँ सब यार बैठे हैं

बहुत आगे गए बाक़ी जो हैं तय्यार बैठे हैं

इंशा अल्लाह ख़ान
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थमते थमते थमेंगे आँसू

रोना है कुछ हँसी नहीं है

बुध सिंह कलंदर
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ज़रा विसाल के बाद आइना तो देख दोस्त

तिरे जमाल की दोशीज़गी निखर आई

फ़िराक़ गोरखपुरी
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बहुत दिनों में मोहब्बत को ये हुआ मा'लूम

जो तेरे हिज्र में गुज़री वो रात रात हुई

फ़िराक़ गोरखपुरी
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आज का शब्द

सानी

  • saanii
  • ثانی

शब्दार्थ

match/ equivalent

बहुत ख़ुश हुए आईना देख कर

यहाँ कोई सानी हमारा था

शब्दकोश
आर्काइव

आज की प्रस्तुति

अग्रणी एवं प्रख्यात प्रगतिशील शायर, रोमांटिक और क्रांतिकारी नज़्मों के लिए प्रसिद्ध, ऑल इंडिया रेडियो की पत्रिका “आवाज” के पहले संपादक, मशहूर शायर और गीतकार जावेद अख़्तर के मामा

आवारा

शहर की रात और मैं नाशाद ओ नाकारा फिरूँ

पूर्ण नज़्म देखें
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सैफ़ महमूद

Urdu Mein Tanz-o-Mizah | Jashn-e-Rekhta 4th Edition 2017

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