आज के चुनिन्दा 5 शेर

वो नहीं भूलता जहाँ जाऊँ

हाए मैं क्या करूँ कहाँ जाऊँ

इमाम बख़्श नासिख़
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कमर बाँधे हुए चलने को याँ सब यार बैठे हैं

बहुत आगे गए बाक़ी जो हैं तय्यार बैठे हैं

इंशा अल्लाह ख़ान

क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है

हम ख़ाक-नशीनों की ठोकर में ज़माना है

जिगर मुरादाबादी

रखना है कहीं पाँव तो रक्खो हो कहीं पाँव

चलना ज़रा आया है तो इतराए चलो हो

कलीम आजिज़

इलाही क्या इलाक़ा है वो जब लेता है अंगड़ाई

मिरे सीने में सब ज़ख़्मों के टाँके टूट जाते हैं

जुरअत क़लंदर बख़्श
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आज का शब्द

आस्ताँ

  • aastaa.n
  • آستاں

शब्दार्थ

Abode of a faqir or saint

हाँ आसमान अपनी बुलंदी से होशियार

अब सर उठा रहे हैं किसी आस्ताँ से हम

शब्दकोश
आर्काइव

आज की प्रस्तुति

स्वतंत्रता सेनानी और संविधान सभा के सदस्य। ' इंक़िलाब ज़िन्दाबाद ' का नारा दिया। कृष्ण भक्त , अपनी ग़ज़ल ' चुपके चुपके, रात दिन आँसू बहाना याद है ' के लिए प्रसिद्ध

रौशन जमाल-ए-यार से है अंजुमन तमाम

दहका हुआ है आतिश-ए-गुल से चमन तमाम

पूर्ण ग़ज़ल देखें
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आसिफ़ शेख़

Bhabhi ji urdu boliye | Aasif Sheikh with Manoj Santoshi | 5th Jashn-e-Rekhta 2018

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