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गुलज़ार

Urdu poets and poetry: Jashn-e-Rekhta 2017

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आज के टॉप 5

चमन में रखते हैं काँटे भी इक मक़ाम दोस्त

फ़क़त गुलों से ही गुलशन की आबरू तो नहीं

उम्मीद फ़ाज़ली

फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था

वो मुझ से इंतिहाई ख़ुश ख़फ़ा होने से पहले था

अनवर शऊर

देखें क़रीब से भी तो अच्छा दिखाई दे

इक आदमी तो शहर में ऐसा दिखाई दे

ज़फ़र गोरखपुरी

बुरी सरिश्त बदली जगह बदलने से

चमन में के भी काँटा गुलाब हो सका

आरज़ू लखनवी
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एक ही शय थी ब-अंदाज़-ए-दिगर माँगी थी

मैं ने बीनाई नहीं तुझ से नज़र माँगी थी

इज़हार असर
आर्काइव
आज का शब्द

क़बा

  • qabaa
  • قبا

शब्दार्थ

Apparel/ garment

ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है जिस में

हर घड़ी दर्द के पैवंद लगे जाते हैं

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आर्काइव

जश्न

जन्मदिन

पाकिस्तान की सबसे लोकप्रिय शायरात में शामिल। स्त्रियों की भावनओं को आवाज़ देने के लिए मशहूर

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ई-पुस्तकालय

उर्दू साहित्य का सबसे बड़ा ऑनलाइन संग्रह

Indimal

हुमैरा रहमान 

1984 काव्य संग्रह

शाहिदा हसन नंबर: खण्ड-011

गुलज़ार जावेद 

2002 चहार-सू

माह-ए-तमाम

परवीन शाकिर 

2008 महाकाव्य

दीवान-ए-साकिब

ज़ाकिर हुसैन साक़िब 

1936 दीवान

Aab-e-Gum

मुशताक़ अहमद यूसुफ़ी 

1990 हास्य-व्यंग

ई-पुस्तकालय

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