आज के चुनिन्दा 5 शेर

मोहब्बत करने वाले दर्द में तन्हा नहीं होते

जो रूठोगे कभी मुझ से तो अपना दिल दुखाओगे

आज़िम कोहली

इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है

सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है

जिगर मुरादाबादी

करूँगा क्या जो मोहब्बत में हो गया नाकाम

मुझे तो और कोई काम भी नहीं आता

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

एक लम्हे में बिखर जाता है ताना-बाना

और फिर उम्र गुज़र जाती है यकजाई में

अहमद मुश्ताक़

जिन से इंसाँ को पहुँचती है हमेशा तकलीफ़

उन का दावा है कि वो अस्ल ख़ुदा वाले हैं

अब्दुल हमीद अदम
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आज का शब्द

बशर

  • bashar
  • بشر

शब्दार्थ

Mankind/ Human beings

आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं

सामान सौ बरस का है पल की ख़बर नहीं

the time of his death, man cannot foresee

uncertain of the morrow yet, plans for a century

the time of his death, man cannot foresee

uncertain of the morrow yet, plans for a century

शब्दकोश

Quiz A collection of interesting questions related to Urdu poetry, prose and literary history. Play Rekhta Quiz and check your knowledge about Urdu!

Kunwar Mahinder Singh Bedi's takhallus (pen-name) was?
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क्या आप जानते हैं?

इमाम

इमाम बख़्श नासिख़ और हैदर अली आतिश समकालीन और दबिस्तान-ए-लखनऊ के आफ़ताब-ओ-माहताब थे। नासिख़ में दुनियादारी बहुत थी, इसलिए लोगों से उनकी गरिमा के अनुरूप मिलते थे। उस ज़माने के बहुत से रईस और नवाब उनके शागिर्द थे। इसके विपरीत आतिश दरवेश स्वभाव थे। सांसारिक वस्तुओं का तनिक भी मोह न था। दोनों के बीच प्राय: शायराना नोक झोंक चलती थी। आतिश ने लोकप्रिय शे'र:

सुन तो जहां में है तेरा फ़साना क्या
कहती है तुझको ख़ल्क़-ए-ख़ुदा ग़ायबाना क्या

नासिख़ के लिए ही कहा था।
इशरत लखनवी ने लिखा है कि जब आतिश को नासिख़ के देहांत की ख़बर मिली तो चीख़ मार कर रोने लगे। लोगों ने कहा कि वह तो आप के दुश्मन थे, आपको तो ख़ुश होना चाहिए। कहने लगे, "मियां क्या कहते हो,हम और वह फ़ैज़ाबाद में मुद्दतों एक रईस के यहां मुलाज़िम रहे। एक मुद्दत तक हमप्याला व हमनिवाला रहे, हमेशा दोस्ती का बर्ताव रहा। शायराना नोक झोंक की और बात है और इतना पुराना तो दुश्मन भी नहीं मिलता।"

आर्काइव

जश्न

जन्मदिन

पाकिस्तानी शायरा, इक़बाल के फ़ारसी कलाम का पद्यात्मक अनुवाद भी किया

कुछ अजनबी से लोग थे कुछ अजनबी से हम

दुनिया में हो पाए शनासा किसी से हम

पूर्ण ग़ज़ल देखें

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