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एहसान दानिश

1914 - 1982 | लाहौर, पाकिस्तान

20वीं सदी के चौथे और पाँचवे दशकों के सबसे लोकप्रिय शायरों में से एक, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के समकालीन।

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

एहसान दानिश

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कुछ लोग जो सवार हैं काग़ज़ की नाव पर

एहसान दानिश

यूँ न मिल मुझ से ख़फ़ा हो जैसे

एहसान दानिश

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Yun na mil mujhse khafa ho jaise

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Yun na mil mujhse khafa ho jaise

Yun na mil mujhse khafa ho jaise मेहदी हसन

शफ़क़त अमानत अली

न सियो होंट न ख़्वाबों में सदा दो हम को

न सियो होंट न ख़्वाबों में सदा दो हम को मेहदी हसन

परस्तिश-ए-ग़म का शुक्रिया क्या तुझे आगही नहीं

परस्तिश-ए-ग़म का शुक्रिया क्या तुझे आगही नहीं शफ़क़त सलामत अली ख़ान

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