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हरगोपाल तुफ्ता

1799/1800 - 1879 | सिकंदराबाद, भारत

शेर 2

'ग़ालिब' वो शख़्स था हमा-दाँ जिस के फ़ैज़ से

हम से हज़ार हेच-मदाँ नामवर हुए

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कुछ सूझा उस बुत-ए-नाज़ुक-अदा को देख कर

रह गए सकते में हम शान-ए-ख़ुदा को देख कर

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ई-पुस्तक 3

Deewan-e-Tilmeez-e-Ghalib

 

1869

Deewan-e-Tufta

 

 

Mirza Hargopal Tufta

 

2008