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जावेद अनवर

कनाडा

ग़ज़ल 12

शेर 9

सुनो कि अब हम गुलाब देंगे गुलाब लेंगे

मोहब्बतों में कोई ख़सारा नहीं चलेगा

निकल गुलाब की मुट्ठी से और ख़ुशबू बन

मैं भागता हूँ तिरे पीछे और तू जुगनू बन

जो दिन चढ़ा तो हमें नींद की ज़रूरत थी

सहर की आस में हम लोग रात भर जागे

शाम प्यारी शाम उस पर भी कोई दर खोल दे

शाख़ पर बैठी हुई है एक बेघर फ़ाख़्ता

कोई कहानी कोई वाक़िआ सुना तो सही

अगर हँसा नहीं सकता मुझे रुला तो सही

पुस्तकें 9

Brindavan

 

1992

Dr. Zubair Farooq Shakhsiyat Aur Fan

 

2009

Sun To Sahi

 

1990

Tahreek-e-Adab,Varanasi

October-December: Shumara Number-008

2010

Tahreek-e-Adab,Varanasi

Shumara Number-017

2013

Tahreek-e-Adab,Varanasi

Shumara Number-016

2013

Tahreek-e-Adab,Varanasi

October-December: Shumara Number-025

2015

Tahreek-e-Adab,Varanasi

April-June: Shumara Number-035

2018

Tahreek-e-Adab,Varanasi

Shumara Number-003

2009

 

ऑडियो 5

अजब ख़्वाबों से मेरा राब्ता रक्खा गया

निकल गुलाब की मुट्ठी से और ख़ुशबू बन

फिर अपनी ज़ात की तीरा-हदों से बाहर आ

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI