aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "Men"
युग बीते दुनिया में आएसोच वही मेहमानों सी है
तुम औरतों पे हम ने हमेशा सितम किएहम मर्द हैं सदा के जफ़ा-कार ख़ुश रहो
मर्दुम-ओ-आदमी बशर इंसानफ़ज़्ल-ए-बारी के सब हैं शुक्र-गुज़ार
मर्द हों ऐसे सितमगर नहीं अच्छे लगतेआइने तोड़ते पत्थर नहीं अच्छे लगते
दीन-ओ-दुनिया की मसर्रत के लिएमर्द-ओ-ज़न में ख़ुश-गवारी चाहिए
इस जवाँ-मर्दी के सदक़े जाइए हर बात परसर कटाने के लिए रहते हैं अब तय्यार लोग
हम तुम हैं दिल-ओ-जाँ से अगर एक ही 'मर्दां'कहने को हैं वो एक हैं हम दो हैं मगर क्या
आदमी बन के हम को मिलते हैंचलते फिरते अजाइबात बहुत
काम मर्दों का है ये ऐ 'आतिश'रखती है जान का भी खटका लूट
समधन बताओ किस का गला अब दबाऊँ मैंछे मर्दुओं में तुम ने मंगाए हैं हार पाँच
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