aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "abjad"
है कुशाद-ए-ख़ातिर-ए-वा-बस्ता दर रहन-ए-सुख़नथा तिलिस्म-ए-क़ुफ़्ल-ए-अबजद ख़ाना-ए-मकतब मुझे
सब्त कर और कोई मोहर मिरे होंटों परक़ुफ़्ल-ए-अबजद से नहीं बंद हुआ बाब मिरा
बा-ए-बिस्मिल्लाह खोलेगीजो क़ुफ़्ल-ए-अबजद है दिल में
दिल भी क़ुफ़्ल-ए-अबजद है एक नाम पूछे हैजान ले तो खुल जाए आख़िर इस में हैरत क्या
मिरे दिल की गिरह बातें बनाने से नहीं खुलतीकि मुझ में बस्तगी कुछ क़ुफ़्ल-ए-अबजद से ज़ियादा है
ये काएनात मिरी जान क़ुफ़्ल-ए-अबजद हैमैं खोलता हूँ इसे कर के मुम्किनात में गुम
मुद्दत से है बंद क़ुफ़्ल-ए-अबजदऐ मुहतसिबो हिसाब कैसा
क़ुफ़्ल-ए-अबजद हूँ बस इक तरतीब सेखोलने वाला हो खुल जाता हूँ मैं
जब तिलिस्म-ए-क़ुफ़्ल-ए-अबजद खुल गयाहासिल-ए-गुफ़्तार-ए-सरमद खुल गया
ये काएनात मिरी जान क़ुफ़्ल-ए-अबजद हैमैं खोलता हूँ इसे करके मुम्किनात में गुम
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