aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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कि शाहज़ादे की आदतें देख कर सभी इस पर मुत्तफ़िक़ हैंये जूँ ही हाकिम बना महल का वसीअ' रक़्बा हरम बनेगा
हम जो पहुँचे सर-ए-मक़्तल तो ये मंज़र देखासब से ऊँचा था जो सर नोक-ए-सिनाँ पर देखा
तहम्मुल ऐ मोहब्बत हिज्र पथरीला इलाक़ा हैतुझे इस रास्ते पर तेज़-रफ़्तारी नहीं करनी
करया-ए-गिरया में मिरा गिर्या हुनर-वराना हैयाँ से कहीं टलूँगा मैं दाद-ए-हुनर लिए बग़ैर
बे-अहवाली की हालत है शायद या शायद कि नहींपर अहवालिय्यत बरपा है अल्लाह-हू के बाड़े में
मौजूदी से इंकारी है अपनी ज़िद में नाज़-ए-वजूदहालत सी हालत बरपा है अल्लाह-हू के बाड़े में
बाबा अलिफ़ इरशाद-कुनाँ हैं पेश-ए-अदम के बारे मेंहैरत बे-हैरत बरपा है अल्लाह-हू के बाड़े में
होने को यूँ तो शहर में अपना मकान थानफ़रत का रेगज़ार मगर दरमियान था
घना वीरान और ख़ामोश जंगलमिरे अतराफ़ में फैला हुआ है
मैं तुझ से मिलने समय से पहले पहुँच गया थासो तेरे घर के क़रीब आ के भटक रहा हूँ
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