aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "assembly"
यक नज़र बेश नहीं फ़ुर्सत-ए-हस्ती ग़ाफ़िलगर्मी-ए-बज़्म है इक रक़्स-ए-शरर होते तक
जल उठे बज़्म-ए-ग़ैर के दर-ओ-बामजब भी हम ख़ानुमाँ-ख़राब आए
न पूछ-गछ थी किसी की वहाँ न आव-भगततुम्हारी बज़्म में कल एहतिमाम किस का था
तमाम बज़्म जिसे सुन के रह गई मुश्ताक़कहो वो तज़्किरा-ए-ना-तमाम किस का था
ये कौन लोग हैं मौजूद तेरी महफ़िल मेंजो लालचों से तुझे मुझ को जल के देखते हैं
थोड़ी सी इजाज़त भी ऐ बज़्म-गह-ए-हस्तीआ निकले हैं दम-भर को रोना है रुलाना है
तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहींमहफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है
अहल-ए-महफ़िल पे कब अहवाल खुला है अपनामैं भी ख़ामोश रहा उस ने भी पुर्सिश नहीं की
सोच कर उस की ख़ल्वत-अंजुमनीवाँ मैं अपनी कमी को भूल गया
हर बज़्म में मौज़ू-ए-सुख़न दिल-ज़दगाँ काअब कौन है शीरीं है कि लैला है कि तुम हो
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