aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "captain"
जरनैल तो सहरा में हैं और कोह में करनैलहै शहर में छोड़ा मुझे कप्तान समझ कर
आख़िर तुझ को मानेंगेनक़्क़ादों को ख़ूब लताड़
हर इक नौ-शाह को 'नक़्क़ाश' के रबशुऊ'र-ए-हज़रत-ए-'क़ासिम' अता कर
और सब कुछ तो चले छोड़ के 'नक़्क़ाश' मियाँरह गया सर पे सर-ए-शाम सर-ए-शाम का दुख
जो हवा पर सवार हो साहबकब वो चलता है साथ पैदल के
तुम खो जाना रक़्स में अपनेमेरा सर चकराने देना
ये ख़ुलासा है एक चैप्टर कातुम कहानी में देर से आए
हम लाश समझ कर जिसे फेंक आए थे वो शख़्सचट्टान की मानिंद अलम बन के खड़ा है
सवार तौसन-ए-हस्ती हूँ इस सलीक़े सेलगाम हाथ में 'आरिफ़' न पा रिकाब में है
मैं ही मेरा मक़्तल हूँमेरा सर कटा मुझ में
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