aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "carpet"
तेरी दस्तार पे तन्क़ीद की हिम्मत तो नहींअपनी पा-पोश को क़ालीन कहा है मैं ने
ख़ुशबू है चाँदनी है लब-ए-जू है और मैंकिस बे-पनाह रात में तन्हा किया मुझे
छोड़ा मह-ए-नख़शब की तरह दस्त-ए-क़ज़ा नेख़ुर्शीद हुनूज़ उस के बराबर न हुआ था
ख़राब कोशक-ए-सुल्तान ओ ख़ानक़ाह-ए-फ़क़ीरफ़ुग़ाँ कि तख़्त ओ मुसल्ला कमाल-ए-रज़्ज़ाक़ी
मिरी बज़्म-ए-दिल तो उजड़ चुकी मिरा फ़र्श-ए-जाँ तो सिमट चुकासभी जा चुके मिरे हम-नशीं मगर एक शख़्स गया नहीं
है मेराज-ए-ख़िरद भी अर्श-ए-आज़मजुनूँ का फ़र्श पा-अंदाज़ भी है
चाँदनी रात में शानों से ढलकती चादरजिस्म है या कोई शमशीर निकल आई है
उजली उजली सी चाँदनी मेंगोरा गोरा बदन खुला हो
न रूह से धुआँ उठा न आँख ही लहू हुईये किस तलब की चाँदनी में रात सुर्ख़-रू हुई
बादल के अंधेरे में छुप कर मयख़ाने में आ बैठा हैगर चाँदनी हो जाएगी 'क़मर' ये शैख़ नहीं फिर जाने का
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