aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "confession"
मिरी नज़रें भी ऐसे क़ातिलों का जान ओ ईमाँ हैंनिगाहें मिलते ही जो जान और ईमान लेते हैं
कब मुझ को ए'तिराफ़-ए-मोहब्बत न था 'फ़राज़'कब मैं ने ये कहा है सज़ाएँ मुझे न दो
बरबाद-ए-मोहब्बत की दुआ साथ लिए जाटूटा हुआ इक़रार-ए-वफ़ा साथ लिए जा
अब किसी लैला को भी इक़रार-ए-महबूबी नहींइन दिनों बदनाम है हर एक दीवाने का नाम
इक़रार-ए-गुनाह-ए-इश्क़ सुन लोमुझ से इक बात हो गई है
तिरे बदलने के बा-वस्फ़ तुझ को चाहा हैये ए'तिराफ़ भी शामिल मिरे गुनाह में है
ये इक़रार-ए-ख़ुदी है दावा-ए-ईमान-ओ-दीं कैसातिरा इक़रार जब है ख़ुद से भी इंकार हो जाए
बे-मेहरी-ए-हबीब का मुश्किल था ए'तिराफ़यारों ने उस का नाज़ ओ अदा नाम रख दिया
तक़्सीर न ख़ूबाँ की न जल्लाद का कुछ जुर्मथा दुश्मन-ए-जानी मिरा इक़रार-ए-मोहब्बत
जब चाँदनी रातों में तुम ने ख़ुद हम से किया इक़रार-ए-वफ़ाफिर आज हैं हम क्यों बेगाने तेरी बे-रहम निगाहों में
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