aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "crack"
कौन बचाएगा फिर तोड़ने वालों सेफूल अगर शाख़ों से धोखा खाते हैं
हो गई शक़ तो बिल-आख़िर ये अना की दीवारअपनी जानिब कोई दरवाज़ा खुला है मुझ में
पहले तो चौपाल में अपना जिस्म चटख़्ता रहता थाचल निकली जब बात सफ़र की फैल गई आ'साब में चुप
चाक की ख़्वाहिश अगर वहशत ब-उर्यानी करेसुब्ह के मानिंद ज़ख़्म-ए-दिल गरेबानी करे
तू करम कर नहीं सकता तो सितम तोड़ के देखमैं तिरे ज़ुल्म को भी हुस्न-ए-अदा दे दूँगा
किनारों पर तुम्हारे वास्ते मोती बहा लाएघरौंदे भी नहीं तोड़े नदी से चाहते क्या हो
दे रहा है गेसू-ए-मुश्कीन सौदे को जगहकिस के आगे जा के अपने सर को फोड़ा चाहिए
चटख़ उठी है रग-ए-जाँ तो ये ख़याल आयाकिसी की याद से जुड़ता है सिलसिला शब का
देख कलियों का चटकना सर-ए-गुलशन सय्यादसब की और सब से जुदा अपनी डगर है कि नहीं
कोई दराड़ नहीं है शब मेंफिर ये उजाला सा कैसा है
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