aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "cross"
पहुँचेंगे रहगुज़र-ए-यार तलक क्यूँ कर हमपहले जब तक न दो आलम से गुज़र जाएँगे
डूब कर मरना भी उसलूब-ए-मोहब्बत हो तो होवो जो दरिया है तो उस को पार होना चाहिए
इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जानादर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना
सफ़ीना-ए-बर्ग-ए-गुल बना लेगा क़ाफ़िला मोर-ए-ना-तावाँ काहज़ार मौजों की हो कशाकश मगर ये दरिया से पार होगा
ऐ रूह-ए-अस्र जाग कहाँ सो रही है तूआवाज़ दे रहे हैं पयम्बर सलीब से
मरियम कहाँ तलाश करे अपने ख़ून कोहर शख़्स के गले में निशान-ए-सलीब था
सलीब-ए-वक़्त पर मैं ने पुकारा था मोहब्बत कोमिरी आवाज़ जिस ने भी सुनी होगी हँसा होगा
दिल की ख़लिश तो साथ रहेगी तमाम उम्रदरिया-ए-ग़म के पार उतर जाएँ हम तो क्या
बस इसी सोच में हूँ डूबा हुआये नदी कैसे पार की जाए
वो सेहर मुद्दआ-तलबी में न काम आएजिस सेहर से सफ़ीना रवाँ हो सराब में
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