aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "defence"
बुरीदा-सर को सजा दे फ़सील-ए-नेज़ा परदरीदा जिस्म को फिर अर्सा-ए-क़िताल में रख
हिसार-ए-जाँ से बहुत ऊँची हो गई है 'अमीर'फ़सील-ए-जब्र गिराने का इंतिज़ाम करें
न खुल पाया कभी बाब-ए-मोहब्बत कम-नसीबों परफ़सील-ए-शहर-ए-जानाँ से कई सर फोड़ आए हैं
तलवार ले रहे थे हिमायत में फूल कीपतझड़ के मोर्चों में अजब हम ने भूल की
हक़ीक़तों को समझ मस्लहत-शनास न बनफ़सील-ए-जब्र से ख़ुद भी निकल उभार मुझे
पता नहीं कि कहाँ रह-ज़नों की हो यलग़ारकोई दिफ़ाअ' भी रख़्त-ए-सफ़र में रक्खा जाए
इक तिरा नाम था उभरा जो फ़सील-ए-लब परवर्ना सकते में रही सारी ख़ुदाई पहरों
हो नर्ग़ा-ए-बातिल में खड़ा जैसे मुजाहिदमौजों में यूँही सर को उठाता है जज़ीरा
कहाँ से टूट पड़ी बीच में फ़सील-ए-जहाँमोआ'मला तो फ़क़त मेरे बाम-ओ-दर का था
उन्हें तो वार के मौक़े हज़ार बार मिलेहमें दिफ़ा का मौक़ा न एक बार मिला
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