aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "dirham"
हम ने मुद्दत से उलट रक्खा है कासा अपनादस्त-ए-दादार तिरे दिरहम-ओ-दीनार पे ख़ाक
दौलत-ए-इश्क़ से हम काम चलाते थे मियाँबस यही दिरहम-ओ-दीनार हुआ करते थे
हम सख़ी दिरहम-ओ-दीनार लिए फिरते हैंशहर-ए-नादार में अब कोई सवाली भी नहीं
दिरहम-ओ-दीनार के हमराह अक्सर बेश-तरजान का भी दे चुके हैं लोग नज़राना अभी
पिला दे अपने हाथों से ज़रा इक जाम ऐ साक़ीतिरे मय-कश दर-ओ-दीवार-ओ-दिरहम छोड़ आए हैं
बेच कर तुम ने की खरी क़ीमतख़्वाह वो दिरहम हुई कि दाम हुई
ये आबले ये ज़ख़्म सब उस के ही फ़ैज़ हैंमाँगे बग़ैर दिरहम-ओ-दीनार दे गया
क़ीमत-ए-हुस्न-ओ-अदा जान की बाज़ी ठहरीलोग आए थे वहाँ दिरहम-ओ-दीनार के साथ
ये तो सुनती है फ़क़त दिरहम-ओ-दीनार की बातये है दुनिया इसे किरदार नहीं चाहिए है
यूँ भी वो दिल हो कि दिरहम पे खुला रहता हैअपनी इक वज़-ए-जुनूँ थी कि बहाने से गए
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