aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "eden"
नए जहान बसाए हैं फ़िक्र-ए-आदम नेअब इस ज़मीं पे इरम ही नहीं कुछ और भी है
जो मिट्टी को मिज़ाज-ए-गुल अता कर दें वो ऐ वाइज़ज़मीं से दूर फ़िक्र-ए-जन्नत-ए-आदम तो क्या करते
असर-ए-बहार-ए-ख़िज़ाँ असर है कि है फ़सुर्दा मिरी नज़रन हवा-ए-इशरत-ए-बाल-ओ-पर न जुनून-ए-बाग़-ए-जिनाँ रहा
ख़ुश्क सहरा भी नज़र आता है गुलज़ार-ए-इरमहमरही का ये तिरी सारा फ़ुसूँ है यूँ है
ये जो कहना है कि हर हुस्न जफ़ा-पेशा हैएक तोहमत है मिरे रश्क-ए-अदन की हद तक
एक हिजरत है कि तस्वीर हुई जाती हैएक क़िस्सा है सू-ए-बाग़-ए-अदन खींचता है
आदिल है तू इर्स-ए-हद में क्या क्याघर बाग़-ए-नईम है हमारा
'अख़्तर' आ कर चमन-ए-गंग-ओ-जमन को देखेजो ये कहता है कि गुलज़ार-ए-इरम अच्छा है
गुलशन-ए-ख़ुल्द में हर-चंद कि दिल बहलायाकूचा-ए-यार मगर दिल से भुलाया न गया
चुभ रहे हैं मिरे ख़यालों कोबाग़-ए-जन्नत-निशान में काँटे
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