aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "eucalyptus"
तूबा-ए-बहिश्ती है तुम्हारा क़द-ए-रा'नाहम क्यूँकर कहें सर्व-ए-इरम कह नहीं सकते
तारीफ़ तिरे क़द की अलिफ़-वार सिरीजनजा सर्व-ए-गुलिस्ताँ कूँ ख़ुश-अल्हाँ सूँ कहूँगा
ग़ुरूर-ए-सर्व-ओ-समन से कह दो कि फिर वही ताजदार होंगेजो ख़ार-ओ-ख़स वाली-ए-चमन थे उरूज-ए-सर्व-ओ-समन से पहले
साया-ए-सर्व-ए-चमन तुझ बिन डराता है मुझेसाँप सा पानी में ऐ सर्व-ख़िरामाँ छोड़ कर
इक न इक रिफ़अत के आगे सज्दा लाज़िम है तो फिरआदमी महव-ए-सुजूद-ए-सर्व-ए-ख़ूबाँ क्यूँ न हो
जाने किस सोच में डूबा हुआ तन्हा तन्हादिल का आलम है किसी सर्व-ए-लब-ए-जू की तरह
साहिल पे सर्व-ए-नाज़ को दे ज़हमत-ए-ख़िरामबल खा रहा है ख़ाक पे दरिया तिरे लिए
मौसम-ए-गुल आया है यारो कुछ मेरी तदबीर करोयानी साया-ए-सर्व-ओ-गुल में अब मुझ को ज़ंजीर करो
क़द-ए-दिल-जू को तुम्हारे नहीं देखा शायदसरकशी इतनी जो सर्व-ए-लब-ए-जू करते हैं
बाग़-ए-जहाँ में जो है गिरफ़्तार है तिराआज़ाद एक सर्व-ए-गुलिस्ताँ है इन दिनों
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