aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "exchange"
देते हैं जन्नत हयात-ए-दहर के बदलेनश्शा ब-अंदाज़ा-ए-ख़ुमार नहीं है
फिर आई फ़स्ल कि मानिंद बर्ग-ए-आवाराहमारे नाम गुलों के मुरासलात चले
जान सी शय बिक जाती है एक नज़र के बदले मेंआगे मर्ज़ी गाहक की इन दामों तो सस्ती है
ऐसा गाहक कौन है जिस नेसुख दे कर दुख मोल लिया है
कहीं न सब को समुंदर बहा के ले जाएये खेल ख़त्म करो कश्तियाँ बदलने का
'फ़राज़' दौलत-ए-दिल है मता-ए-महरूमीमैं जाम-ए-जम के एवज़ कासा-ए-गदाई न दूँ
बस एक लम्हे के सच झूट के एवज़ 'फ़रहत'तमाम उम्र का इल्ज़ाम ले गया मुझ से
ऐसा नादान ख़रीदार भी कोई होगाजो तिरे ग़म के एवज़ सारी ख़ुदाई ले ले
बदलना करवट और तकिया मिरे पहलू में रख देनावो सोना आप और मेरा जगाना याद आता है
मियान से निकली ही पड़ती थी तुम्हारी तलवारक्या एवज़ चाह का था ख़स्मी-ए-जानी उस की
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