aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "fakhir"
अरमान तुम्हें फ़स्ल-ए-गुलिस्ताँ का है 'फ़ाख़िर'शाख़ों पे यहाँ फूल तो खिलता नहीं कोई
अब पूछते हैं आप कि 'फ़ाख़िर' गुज़र गयाबाक़ी निशाँ तलक न रहा जब मज़ार का
हवा की साज़िशें अपनी जगह मगर 'फ़ाख़िर'शजर की शाख़ों में अब के भी रस पड़ा हुआ है
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