aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "focus"
दीद से जान-ए-दीद तक दिल से रुख़-ए-उमीद तककोई नहीं है दरमियाँ शाम-ब-ख़ैर शब-ब-ख़ैर
हो सके तो आप रखिए अपने ऐबों पर नज़रदूसरों की ख़ामियों पर तब्सिरा अच्छा नहीं
उसी के क़ुर्ब ने तक़्सीम कर दिया आख़िरवो जिस का हिज्र मुझे वज्ह-ए-इंहिमाक हुआ
किस लम्हे हम तेरा ध्यान नहीं करतेहाँ कोई अहद-ओ-पैमान नहीं करते
नींद ज़रा सी जब भी आने लगती हैयाद तुम्हारी शोर मचाने लगती है
मुझे चाल चलने में देर हो गई और मैंकोई एक मोहरा इधर-उधर नहीं कर सका
देख सकेगा कौन बनाने वाले कोसब का सारा ध्यान लगा तस्वीरों में
इधर भी तो उसे इक दिन उठानी हैं निगाहेंहमें भी तो कभी होने का है एहसास होना
सब के आगे नहीं बिखरना हैअब जुनूँ और तरह करना है
फ़ुर्क़त में क्या बताऊँ कि दिन है कि रात हैआँखों को सूझता नहीं रोने के ध्यान में
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