aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "foreign"
दयार-ए-ग़ैर में महरम अगर नहीं कोईतो 'फ़ैज़' ज़िक्र-ए-वतन अपने रू-ब-रू ही सही
'कैफ़' परदेस में मत याद करो अपना मकाँअब के बारिश ने उसे तोड़ गिराया होगा
किसी को गाँव से परदेस ले जाएगी फिर शायदउड़ाती रेल-गाड़ी ढेर सारा फिर धुआँ आई
वो जिस के वास्ते परदेस जा रहा हूँ मैंबिछड़ते वक़्त उसी की तरफ़ नहीं देखा
मैं 'ज़फ़र' ता-ज़िंदगी बिकता रहा परदेस मेंअपनी घर-वाली को इक कंगन दिलाने के लिए
ये अजनबी सी मंज़िलें और रफ़्तगाँ की यादतन्हाइयों का ज़हर है और हम हैं दोस्तो
ग़ैर-मुल्की ज़बान इंग्लिश कोख़्वा-मख़्वाह क्यों रटा करे कोई
ये तहज़ीब-ए-चमन बदली है बैरूनी हवाओं नेगरेबाँ-चाक फूलों पर कली का मुस्कुरा देना
क्यूँ न फैलाएँ पावँ बज़्म में ग़ैरआप के सर चढ़ाए बैठे हैं
एक मुद्दत से मुक़द्दर है ग़रीब-उल-वतनीकोई परदेस में ना-ख़ुश हो तो घर भी जाए
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