aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "gaz"
उज़्लत से निकल शैख़ कि तेरे लिए तयारकोई हफ़्त-गज़ी मेख़ कोई दह-वजबी है
हबाब अपनी ख़ुदी से बस यही कहता हुआ गुज़रातमाशा था हवा ने इक गिरह दे दी थी पानी में
जो नाफ़ा है वो काकुल-ए-मुश्कीं की है गिरहसद-रंग क्या है और है रंग-ए-समन में क्या
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