aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "gore"
अर्ज़ां है मुश्त-ए-ख़ाक से इंसान की हयाततहज़ीब-ए-क़त्ल-ओ-ख़ून में अब ज़िंदगी की ख़ैर
बरबरियत की जहाँ में गर्म-बाज़ारी हुईआदमियत की रगों में ख़ून ठंडा हो गया
मुर्दा है दिल तो गोर है सीनादाग़ शम-ए-मज़ार सा है कुछ
गर्दिश गर्दिश चलने से ही कट पाएगाचारों जानिब एक सफ़र का जाल बिछा है
'गौहर' क्या ताज़ीर लगीबाक़ी पर्चे पेश हुए
फ़िक्र के तीरा-ख़ाने रौशन करलौ देते जज़्बात की सूरत आ
मिरे आँसू हमेशा हैं ब-रंग-ए-लाल-ए-ग़र्क़-ए-ख़ूँजो ग़ोता आब में तू ने गुहर मारा तो क्या मारा
बढ़ गया है इस क़दर अब सुर्ख़-रू होने का शौक़लोग अपने ख़ून से जिस्मों को तर करने लगे
दामन में रवाँ हैं अश्क-ए-गुलगूँमहज़र है ये ख़ून-ए-मुद्दआ का
दिए फ़लक ने मिरे सर को कटते ही गुल-दाग़गिला नहीं कोई पाँव तले जो ख़ार आया
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