aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "grammar"
है क़ाएदा कुल्ली ये कू-ए-मोहब्बत मेंदिल ग़म जो हुआ होगा पैदा न हुआ होगा
दिल पे माना कि इख़्तियार नहींऔर अगर इख़्तियार हो जाए
फिर वो दरिया है किनारों से छलकने वालाशहर में कोई नहीं आँख झपकने वाला
न किसी की याद का नक़्श है न किसी के रुख़ का ये अक्स हैये न कोई हर्फ़ न लफ़्ज़ है सर-ए-ख़ाक क्या है लिखा हुआ
सिखा दिया मुझे आदाब-ए-गुफ़्तुगू तू नेमिरे लिए तो तिरा हुस्न ही ग्रामर है
सब उलट-पलट दी हैं सर्फ़-ओ-नहव-ए-देरीनाज़ख़्म ज़ख़्म जीते हैं लम्हा लम्हा सहते हैं
ऐ दिल किसी की याद भी और इज़्तिराब भीइतना नहीं ख़याल कि मेहमान घर में है
रवाँ-दवाँ नहीं मुझ में कोई तुम्हारे सिवातुम्ही हो मंज़र-ए-मव्वाज चश्म-ए-वाक़ तुम्ही
वो मौत ही है जो देती है सौ तरह के लिबासये ज़िंदगी है कि जो बे-लिबास लगती है
किसी से क़िस्सा-ए-शहर-ए-तिलिस्म कह न सकूँइलाही बेहिस-ओ-बे-नुत्क़-ओ-बे-बसर कर दे
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