aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "jag"
जग बीत चुके मगर अभी तकख़ुद अपनी तलाश में लगा हूँ
ये किस डगर पे अपना मुक़द्दर है आज-कलअपने ही हक़ में अपना सितमगर है आज-कल
लड़ रहा हूँ मैं अकेला कार-ज़ार-ए-हस्ती मेंकर फ़राहम तू भी ज़ालिम अपने होने का जवाज़
सब चलते हैं डगर डगरएक डगर अन-जानी है
ब-आह-ओ-ज़ारी फ़ुग़ान नाला से अपने यारो मैं रोज़ कहताकभी सितमगर के जा के दिल में अरे नि-भागे असर किया कर
झपटता है खुले जंगल में साइक़ा बन करशिकार भी कहीं ऊँचा मचान रखता है
जोगी से और जग की बातेंजोगी का अपमान है साईं
सिर्फ़ जुगनू सा चमकना है 'शहाब'कब मुझे कार-ए-ख़िज़र करना है
जिस से छुपना चाहता हूँ मैं 'अदम'वो सितमगर जा-ब-जा मौजूद है
जाते लम्हे दुहाई देते हैंनए अतवार के तरीक़ पे जाग
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