aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "jam"
मशहूर हैं सिकंदर ओ जम की निशानियाँऐ 'दाग़' छोड़ जाएँगे हम यादगार दिल
मिरे शाह-ए-सुलैमाँ-जाह से निस्बत नहीं 'ग़ालिब'फ़रीदून ओ जम ओ के ख़ुसरव ओ दाराब ओ बहमन को
जान जाएँगे जानने वाले'फ़ैज़' फ़रहाद ओ जम की बात करो
इधर भी एक उचटती नज़र कि दुनिया मेंफ़रोग़-ए-महफ़िल-ए-जम ही नहीं कुछ और भी है
मिरी प्यास बढ़ रही है मिरा दिल सुलग रहा हैजो नहीं है जाम साक़ी तो निगाह से पिला दे
रहने दे जाम-ए-जम मुझे अंजाम-ए-जम सुनाखुल जाए जिस से आँख वो अफ़्साना चाहिए
अब आज क़िस्सा-ए-दारा-ओ-जम का क्या होगाहमारे पास हैं अपनी हिकायतें मत पूछ
नुमायाँ हो चला है इक जहाँ चश्म-ए-तसव्वुर परनज़र शायद हरीफ़-ए-साग़र-ए-जम होती जाती है
'रवाँ' के दर्द का आलम न पूछोकोई यूँ होगा मस्त-ए-जाम-ए-जम क्या
जाम ओ मीना की क़सम हस्ती-सहबा की क़समबादा-कश एक ही लग़्ज़िश में यक़ीं तक पहुँचे
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