aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "lucknow"
हम हैं रुस्वा-कुन-ए-दिल्ली-ओ-लखनऊ अपनी क्या ज़िंदगी अपनी क्या आबरू'मीर' दिल्ली से निकले गए लखनऊ तुम कहाँ जाओगे हम कहाँ जाएँगे
हाल ख़ुश लखनऊ का दिल्ली काबस उन्हें 'मुसहफ़ी' से ख़तरा है
बड़ी मुश्किल से आते हैं समझ में लखनऊ वालेदिलों में फ़ासले लब पर मगर आदाब रहता है
अल्लाह ऐ बुतो हमें दिखलाए लखनऊसोते में भी ये कहते हैं हम हाए लखनऊ
हर-चंद लाख तरह भुलाता हूँ याद को'अख़्तर' पुकार उठता है दिल हाए लखनऊ
आए न मेरे पास तो मैं आप ही चलूँमुझ को ख़ुदा करे कहीं बुलवाए लखनऊ
ऐसा हुआ हूँ हिज्र में उस के नहीफ़-ओ-ज़ारदेखे अगर मुझे वहीं शरमाए लखनऊ
कलकत्ता के हसीनों को जब देख लेता हूँउस वक़्त दिल में होता है सौदा-ए-लखनऊ
मरने के बा'द भी न मिटेगा जिगर से दाग़जन्नत में हम को होएगी परवा-ए-लखनऊ
अब लुट गया है क्या रहा दोज़ख़ से बढ़ के हैरश्क-ए-बहिश्त कहते थे सब जा-ए-लखनऊ
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