aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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बैठे हैं अपनी सीट पर कैसे भगाएँ मास्टरआए हैं दे के फ़ीस हम कोई हमें भगाए क्यों
पूछते हैं मास्टर हम कौन हैंकोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
हम पे तोहमत कि कर दिया बदनामइस क़दर झूट इंतिहा साहब
तुम जो भी करो मालिक-ओ-मुख़्तार हो साहबपाबंदी-ए-पैमान-ए-वफ़ा मेरे लिए है
वो कोई साहब-ए-जागीर हो कि मुल्ला होमगर हमारे लिए क़हरमान एक सा है
ज़िंदगी इक वबाल है साहबअब तो जीना मुहाल है साहब
सराहने लग गया जुनूँ हर किसी को साहबये वो मकाँ है जो ख़ुद मकीनों से जा मिला है
अपना आप मुक़ाबिल हैजीवन दंगल है साहब
जिस पे उन की निगाह होती हैसाहब-ए-इक़्तिदार होता है
है वही ठीक जो कहो 'मजरूह'क्यूँ न हो साहब-ए-ज़बाँ हो तुम
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