aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "moharram"
मेरे महबूब मिरे प्यार को इल्ज़ाम न देहिज्र में ईद मनाई है मोहर्रम की तरह
मौज-ए-हंगाम-ए-चराग़ाँ है न वो रंग-ए-अबीरशोख़ी-ए-ईद भी ख़ामोश मोहर्रम चुप-चाप
जानते हैं वो हुसूल-ए-माया की हर इक सबीलहिफ़्ज़ हैं सज्जादगाँ को ख़ानक़ाही के निसाब
वही कूफ़ी वही लश्कर वही पैमान-ए-वफ़ावही आसार मोहर्रम के महीने वाले
अज़िय्यतें हैं मोहर्रम के बा'द भी कितनीसफ़र मज़ीद हैं माह-ए-सफ़र से आगे भी
ये जौर अहल-ए-अज़ा पर मज़ीद करते रहेसितम-शिआ'र मोहर्रम में 'ईद करते रहे
हो ईद या मोहर्रम हम ग़म किया करेंगेदो रोज़ा दहर-ए-दूँ में मातम किया करेंगे
कोई रंज-ओ-अलम आए न दिल के पास ऐ साक़ीजो हो आग़ाज़-ए-मय-नोशी मोहर्रम के महीने से
इम्तिहाँ-गाह-ए-मोहब्बत से गुज़रने वालोरोज़-ए-आशूरा का हंगाम नज़र में रखना
मंज़िलों के शुमार-ए-कार बताख़्वाहिशों की सबील कितनी है
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