aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "moth"
शम्अ जिस की आबरू पर जान दे दे झूम करवो पतिंगा जल तो जाता है फ़ना होता नहीं
हर रंग में जला 'असद'-ए-फ़ित्ना-इन्तिज़ारपरवाना-ए-तजल्ली-ए-शम-ए-ज़ुहूर था
शम् ओ परवाना न महफ़िल में हों बाहम ज़िन्हारशम्अ'-रू ने मुझे भेजे हैं ये परवाने दो
शम्अ-रूयाँ की सर-अंगुश्त-ए-हिनाई देख करग़ुंचा-ए-गुल पर-फ़िशाँ परवाना-आसा जल गया
इक पतिंगा उजरत थीछिपकिली की जुम्बिश की
फूल के गिर्द फिरो बाग़ में मानिंद-ए-नसीममिस्ल-ए-परवाना किसी शम-ए-तपाँ तक आओ
न गया पर न गया शम्अ का रोना किसी हालगो कि परवाना-ए-मरहूम सा दम-साज़ आया
मैं वो बशर कि मुझ से हर आदमी को नफ़रततुम शम्अ वो कि तुम पर परवाने आदमी हैं
हूँ मैं परवाना मगर शम्अ तो हो रात तो होजान देने को हूँ मौजूद कोई बात तो हो
बुझ गई रौनक़-ए-परवाना तो महफ़िल चमकीसो गए अहल-ए-तमन्ना तो सितमगर आया
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