aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "mujhe"
गिला नहीं है जो उस ने मुझे न पहचानालहू-लुहान मिरी ज़िंदगी का चेहरा था
ग़म-ए-आशिक़ी से बढ़ कर ग़म-ए-ज़िंदगी नहीं हैमैं तिरे करम के क़ुर्बां मुझे कुछ कमी नहीं है
मुझ से उल्फ़त थी तुझ को तुझ से मुझेदेख साबित क़दम रहा है कौन
दिन को न घर से जाइए लगता है डर मुझेइस पारा-ए-सहाब को सूरज न देख ले
ख़ुशी ने मिरा साथ छोड़ा है जब सेमिरे ग़म ही मुझ को सँभाले हुए हैं
हो कोई हम-सफ़र ऐसा जो दिल को हम-नफ़स गुज़रेइसी हसरत पे हर लम्हा मुझे क़ुर्बान लगता है
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books