aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "museum"
रस्ता रस्ता एक अजाइब-गाह 'मुज़फ़्फ़र'हँसती आँखों से जाना शश्दर आ जाना
फिर सजा देगा वो यादों के अजाइब-घर मेंसोच कर अहद-ए-जुनूँ का कोई सिक्का मुझ को
देखते हैं सब मगर कोई मुझे पढ़ता नहींगुज़रे वक़्तों की इबारत हूँ अजाइब-घर में हूँ
तमाम शहर था इक मोम का अजाइब-घरचढ़ा जो दिन तो ये मंज़र न फिर पिघलते क्या
ग़नीमत है कि जंगल के उसूलों को नहीं मानावगर्ना आशियानों को अजाइब-घर बना लेते
अजाइब-घर में रखिए ये किसी क़ारून का सर हैमिला है ये भी आसार-ए-क़दीमा के दफ़ीनों में
बुग़्ज़ अदावत, धोके-बाज़ी, नफ़रत का बाज़ारलोग अजाइब-घर में रख आए हैं सच्चा प्यार
कर लो बावर कोई लाया है अजाइब-घर सेजब किसी जिस्म पे हँसता हुआ चेहरा देखो
यादें फ़्रेम करा रक्खी थींदिल भी एक अजाइब-घर था
जहान-ए-नौ में अजाइब-घरों की ज़ीनत हैंतमाम ग़ाज़ी तमामी शहीद तौबा कर
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