aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "na"
गिला नहीं है जो उस ने मुझे न पहचानालहू-लुहान मिरी ज़िंदगी का चेहरा था
खुला कुछ न मुझ पर न आने का मंशाजिहत कुछ तो फ़रमाइए क्या सबब है
न राहों से शनासाई न रहबर से तआ'रुफ़ हैहज़ारों जुस्तुजुएँ कर के हिम्मत हार बैठे हैं
न दिल निकलता है उस का न शाम होती हैअब इस तरह से भी कोई जहाँ में रहता है
फूलों में दिलकशी है न कलियों पे है निखाररंगीन गुल्सिताँ के नज़ारे हुए तो क्या
न तुई है न कनारी न गोखरू तिस परसजी है शोख़ ये अंगिया बुनत के मीने में
झूलती थी कल इसी गहवारे में मा'सूमियतआज ये दिल महशरिस्तान-ए-तमन्ना हो गया
भाई-चारा न दोस्ती न ख़ुलूससब की तह में कोई ज़रूरत है
न राह मुश्किल न दूर मंज़िल मगर मिरे राहबर बता देतिरी क़यादत में चलने वाले ब-क़ैद-ए-ख़ौफ़-ओ-हिरास क्यों हैं
न वो पर्दा-दार है राज़ में न किसी की पर्दा-दारी रहीजो पड़े थे पर्दे सब उठ गए मगर अब भी जल्वागरी रही
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