aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "panic"
ठहर जा जोश-ए-तपिश है तो तड़पना लेकिनचारासाज़ों में ज़रा दम दिल-ए-ज़ार आ जाए
मुतरिब-ए-ख़ुल्द क्या सुनाए वहशत-ए-ख़स्ता क्या सुनेमो'तक़िद-ए-क़दीम है ज़मज़मा हिजाज़ का
मुश्किल है मफ़र वहशत-ए-तन्हाई से 'इरफ़ान'जो क़र्या है आबाद बयाबाँ भी वही है
ठहर के जिस ने भी कुछ देर ख़ुद को देख लियावो अपनी वहशत-ए-बे-जा का चारागर ठहरा
दर से वहशत-ज़दों को ख़ुद न उठाये कोई एक जाए बैठे हैं
गेसू हैं परेशाँ बुलबुल के और चाक गिरेबाँ हैं गुल केपैनिक में है सब्ज़ा शाम ओ सहर मालूम नहीं क्या होना है
सब ने जाना एक अपना हम-वतन कम हो गयाग़म अगर निकला तो दिल की हसरतें घबरा गईं
क्यों ज़माना नहीं वाक़िफ़ हम सेहैबत-ओ-ख़ौफ़-ओ-ख़तर हैं हम लोग
लरज़ते होंट नीले पड़ रहे थेबदन से अंग हिजरत कर रहे थे
इंसान बन के बैठा है हर आदमी-नुमादुनिया पे इक ख़याल की दहशत है आज भी
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