aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "perfume"
आमद पे तेरी इत्र ओ चराग़ ओ सुबू न होंइतना भी बूद-ओ-बाश को सादा नहीं किया
शाम-ब-ख़ैर शब-ब-ख़ैर मौज-ए-शमीम-ए-पैरहनतेरी महक रहेगी याँ शाम-ब-ख़ैर शब-ब-ख़ैर
तबस्सुम इत्र जैसा है हँसी बरसात जैसी हैवो जब भी बात करती है तो बातें भीग जाती हैं
यूँ लगा जैसे कोई इत्र फ़ज़ा में घुल जाएजब किसी बच्चे ने क़ुरआँ की तिलावत की है
वो इत्र-दान सा लहजा मिरे बुज़ुर्गों कारची-बसी हुई उर्दू ज़बान की ख़ुशबू
दिमाग़-ए-इत्र-ए-पैराहन नहीं हैग़म-ए-आवारगी-हा-ए-सबा क्या
न इत्र ओ ऊद न जाम ओ सुबू न साज़ ओ सुरूरफ़क़ीर-ए-शहर के घर शहरयार क्या उतरें
क़ैद होने से रहीं नींद की चंचल परियाँचाहे जितना भी ग़िलाफ़ों को मोअत्तर कर दे
हम ने महफ़ूज़ किया हुस्न-ए-बहारइत्र-ए-गुल सर्फ़-ए-ख़िज़ाँ था पहले
ग़श हैं कि बे-दिमाग़ हैं गुल-पैरहन नमतअज़-बस दिमाग़-ए-इत्र-ए-गरेबाँ नहीं रहा
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